अप्रेरक प्रसंगः दास न रहे उदास

Betuki - Vyang Baan भ्रष्टाचार की मूर्ति दास जी नित्यकर्म के बाद जैसे ही चिलमन से बाहर आये चमचे दहाड़ मारते उनकी तरफ दौड़ पड़े। दास जी ने तनिक प्यार से पूछा, भैये चमचों क्या परेशानी है। दो-तीन-चार नम्बर के काम के धनी चमचे ने मुंह खोला, महाराज महंगाई मार रही है। दास जी न... [पूरी पोस्ट]
writer betuki@bloger.com
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[25 Oct 2008 05:34 AM]

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