वो चाँद तेरे शहर का........The moon of your city
रात सोयी तो यही सोचकर थी की कल से अकेले बहार नही निकलूंगी लेकिन अजीब बात ये हुयी कि नमाज़ से फारिग होते ही बाहर जाने को दिल मचल उठा . पता नही क्यों बहन को साथ चलने के लिए कहने का भी ख्याल नही आया , और मैं बस उसे दरवाज़ा बंद करने का कहकर बाहर निकल आई ....
[पूरी पोस्ट]
rakhshanda
17
0
0
0
0
[07 Jul 2008 02:11 AM]



Shuffle








