वो आईना तो ख़ुद हस्ती में तेरे रहता है...
कभी कभी ऐसा होता है न कि जब हम नसीहतों की बडी सी टोकरी लिए सारे ज़माने को बांटने की कोशिश कर रहे होते हैं तो पता नहीं क्यों, अपना हिस्सा बचाना भूल जाते हैं . शायद हमारे लाशऊर में कहीं न कहीं ये गुमान होता है कि हमें इसकी ज़रुरत नही है . वो तो जब किसी...
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rakhshanda
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[22 Jul 2008 02:15 AM]



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