ये मौसम हमें खा जायेगा...
अब नही जागे तो ये मौसम हमें खा जाएगा धुप चल कर आ गई है साया-ऐ-दीवार तक एक खौफ का साया है हर तरफ, अजीब सा माहौल है शहर का. लब खामोश हैं लेकिन फजाएं इस खौफ की आहट सुन रही हैं. एक निगाह दूसरी निगाह से बडे खामोश से सवाल करती है और जाने क्यों दूसरी निगाह...
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rakhshanda
खौफ का मंज़र..
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[02 Aug 2008 07:22 AM]



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