एक सुबह को छू कर देखा......

Pretty woman गुलामी किसी नासूर की तरह होती है. ये दर्द वही समझ सकता है जिसने इसका दर्द सहा हो. जिल्लतों और वहशतों का वो दर्दनाक दौर जो हम ने सौ साल तक झेला है, उसका अहसास हमारी नस्लों को हमेशा याद रहेगा और रहना भी चाहिए. इसीलिए १५ अगस्त की ये मुबारक सुबह जब तुलू... [पूरी पोस्ट]
writer rakhshanda

आज़ादी का दिन

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[14 Aug 2008 02:07 AM]

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