बड़ी वफ़ा से...
बड़ी वफ़ा से निभा रहे थे तुम, थोड़ी-सी बेवफाई कर दी क्या आलम था तेरे उन्स का, और तुम्हीं ने जगहंसाई कर दी दश्ते-फ़िराक़ में छोड़ कर तन्हा, तुम न जाने कहाँ गुम हुए वाह मेरे रहनुमा! क्या खूब तुमने मेरी रहनुमाई कर दी मुजस्सिम हँसी बनकर आये थे मेरी जिंदगी में...
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क्षितीश
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[19 Sep 2008 07:17 AM]



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