तुम आए...
तुम आए, दिलजोई हुई मुस्कुरा पड़ी आँख रोई हुई महक उठीं कलियाँ जज्बात की शबनमे-अश्क़ से धोई हुई मचल-मचल गईं आज हसरतें दिल की सोई हुई शमए-आरजू थी दिल में बुझी-बुझी, खोई हुई सोचते रहे ता-उम्रे-फ़िराक़ खता कब हमसे कोई हुई रो-रोकर तुम्हारी याद में अफ़साने हुए...
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क्षितीश
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[20 Sep 2008 06:57 AM]



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