कहने को कह गए कई बात...
कहने को कह गए कई बात ख़ामोशी से कटते-कटते कट ही गई रात ख़ामोशी से न शोर-ए-हवा, न आवाज़-ए-बर्क़ कोई निगाहों में अपनी हर दिन बरसात ख़ामोशी से शायद तुम्हें ख़बर न हो लेकिन यूँ भी बयाँ होते हैं कई जज्बात ख़ामोशी से दिल की दुनिया भी कितनी ख़ामोश दुनिया है किसी...
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क्षितीश
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[04 Dec 2008 15:17 PM]



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