लेकर हाथों में वो आईना...
लेकर हाथों में वो आईना पूछते हैं मुझसे मेरी ज़िंदगी का मायना पूछते हैं रोशनी अपने हिस्से की उन्हें दे चुका फिर भी किसे कहते हैं चाहना- पूछते हैं इस मासूमियत को आखिर क्या कहिए क्यूँ भूल गया हूँ मैं हँसना, पूछते हैं जिन लबों ने कभी आने को कहा नहीं उन्ही...
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क्षितीश
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[05 Dec 2008 09:16 AM]



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