कोशिशें बेहतर, मुसलसल कर...
कोशिशें बेहतर, मुसलसल कर ज़िंदगी मुअम्मा सही, हल कर इस दुनिया में तेरे दुश्मन बहुत हैं ऐ दिल, जरा सम्हल कर ज़िंदगी रेहन न रख अँधेरे के गुम हुआ नहीं है शम्स ढल कर दुनिया खड़ी है इंतज़ार में तेरे दायरे से अपने आ तो निकल कर मुनासिब है एक चाँद हो सब के ल...
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क्षितीश
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[08 Dec 2008 05:31 AM]



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