बिखरती जुल्फों के जब...
बिखरती जुल्फों के जब पहरे हो जाते हैं क़ायनात के सारे फूल तेरे चेहरे हो जाते हैं अंगूठे से यूँ ज़मीं को कुरेदा ना करो ज़ख्म दिल के हरे हो जाते हैं नीची निगाहों से दिल पे ना करो चोट जज्बात मेरे और गहरे हो जाते हैं सुना है- इश्क़ में पड़ते हैं जब दो दिल...
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क्षितीश
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[10 Dec 2008 07:43 AM]



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