ज़िंदगी ने एक रोज़ मुझे...
ज़िंदगी ने एक रोज़ मुझे तेरा पता दिया चंद गुलाब खिले दरम्याँ, साँस-साँस महका दिया क़तरा-क़तरा पिघलता रहा चाँद आँखों में सारी रात तेरी हँसी ने जाने ये क्या गुल खिला दिया ख्वाहिशों की मुंडेर पर पिछली शब कोई परिंदा था इस दर्द से चहका के भरी नींद से जगा द...
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क्षितीश
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[12 Dec 2008 11:24 AM]



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