तमन्ना ही रही दिल की...
मेरे लिए तुम कभी मेरे पास आते, तमन्ना ही रही दिल की- कोई गीत तुम मेरे लिए भी गाते... जब भी तुम आए कोई और था साथ तुम्हारे- तुम्हारी बातों में, तुम्हारी राहों में तुम उसी के लिए थे हँसते, उसी के लिए मुस्कराते... तुम्हारा हर क़दम उसी के जानिब उठते रहे त...
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क्षितीश
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[15 Dec 2008 08:55 AM]



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