कहना तो है तुमसे...
कहना तो है तुमसे, डर है- तुम्हें खो न दूँ साथ हो तो हँसी है, फिर कहीं रो न दूँ यकीं मानो मेरा- कुछ तो नहीं मेरे पास देने को वरना कुछ हो मेरे पास, और तुम्हें वो न दूँ तुख्मे-मुहब्बत लिए भटकता फिरता हूँ शहरो-सहरा चैन से कैसे बैठ रहूँ, जब तलक इन्हें बो...
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क्षितीश
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[22 May 2009 08:18 AM]



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