दीपावली की शुभकामनाएँ
उजालों की चाह में उड़ कर सूर्य से मन का दिया जला लूँ ज़रा अमावास के अँधेरों के लिये रौशन उजाले सँभाल लूँ ज़रा कोई छू ले तो लौ से उजाले उसमें भी कर दूँ मैं ज़रा रात ऐसी है यह चाँद के उजाले भी नहीं दिये से दिये जलाकर अँधेरों को बुझा दे ज़रा...
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विनीत खरे
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[25 Oct 2008 01:04 AM]



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