'सौगात'

सौगात' थका थका हर दिन का लम्हा , काली अंधियारी रात मिली , तार तार कुछ टुकडों मे दामन, बिखर गई जो भी सौगात मिली हसने रोने मे फर्क करें क्या दोनों संग आंसू की बरसात मिली कोई सखी ना संगी साथी किस्मत में तन्हाई की बारात मिली जीवन का मकसद तो समझ ना आया ,... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta
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[05 Nov 2008 05:47 AM]

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