"निगाहे-नाज़"

निगाहे-नाज़" बेज़ारी जान की थी या, किसी गम की गीरफ्तारी थी, अंधेरी रात मे भी, " रोशन रूखे- यार देखा" शायद ये निगाहे-नाज़ की, " बीमारी थी" (बेज़ारी - उदासीनता ) (रूखे- यार - प्रेमिका का चेहरा) (निगाहे-नाज़ - चंचल आँख) http://vangmaypatrika.blogspot.com/200... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta
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[21 Apr 2009 07:13 AM]

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