"तुम्हें पा रहा हूँ"

तुम्हें पा रहा हूँ" तुम्हें खो रहा हूँ तुम्हें पा रहा हूँ, लगातार ख़ुद को मैं समझा रहा हूँ.... ना जाने अचानक कहाँ मिल गयीं तुम, मैं दिन रात तुमको हे दोहरा रहा हूँ........ शमा बन के तुम सामने जल रही हो, मैं परवाना हूँ और जला जा रहा हूँ .... तुम्हारी ज... [पूरी पोस्ट]
writer seema gupta
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[13 Jul 2009 23:03 PM]

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