ग़ज़ल्
सच ढूंढ्ता रहा शहादत देखिये। झूठ की हो भी गई ज़मानत देखिये। अब मौत के आसार हैं ज़्यादा क्योंकि कड़ी कर दी गई है हिफ़ाज़त देखिए। भ्रष्टाचार का जंगल तैयार क्यों न हो, वृक्षारोपण कर रही है सिसायत देखिये। घरों को बौना रखने के आदेश जो दे गये है, आसमान चूमती उ...
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प्रकाश बादल
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[06 May 2009 02:36 AM]



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