मन ना जाने मन को
मन ना जाने मन को नन्हा पौधा बहुत दूर कहीं पर था । सच पूछो तो वह पौधा भी नही - केवल एक बीज था । या, बीज भी नही, बस एक खयाल! ना, वह भी नही ! कुछ भी नही था। बस एक अनाम सा अस्तित्व बोध, कि कुछ है ! फिर कैसे वह धीरे धीरे तुम्हारे पास आ गया ? अमूर्त से मूर...
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Leena Mehendale
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[15 Dec 2007 14:15 PM]



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