मार्निंग वाक और हम

अंतर्मन रोज आँख खुलते ही एक बहस शुरु हो जाती थी ।आलस्य त्यागों और मार्निंग वाक शुरु करो कभी आइने में खुद को निहार लिया करो। दिन दूनी रात चौगुनी फैलती जा रही हो पति देव की सुबह आजकल इन्हीं भाषण के साथ शुरु होती थी । हम भी पक्के मठ्ठूस एक कान से सुनते और दूसरे... [पूरी पोस्ट]
writer anuradha srivastav
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[26 Oct 2007 00:45 AM]

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