"शिक्षक बनाम बिना रीढ की हड्डी वाला प्राणी"

अंतर्मन एक समय था जब शिक्षक को सबसे सम्मानीय समझा जाता था। जहाँ तक मेरे बचपन की मुझे याद है हम अपने शिक्षक के नियमित रूप से पैर छूते थे। वो भी प्रत्येक विद्यार्थी को निजी तौर पर जानते थे। आज ना शिक्षक अपने विद्यार्थी को जानता है ना उसका उसे मौका ही मिल पाता... [पूरी पोस्ट]
writer anuradha srivastav
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[07 Dec 2007 01:03 AM]

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