"आइये स्वागत करें ,ऐसे फैसलों का"

अंतर्मन कुछ दिनों पहले हम रिश्तेदारी में एक जगह मिलने गये। सबसे मेल-मुलाकात हो गई उनके सुपुत्र जी नादारद थे।पता चला वीडियोगेम खेल रहें हैं । काफी बुलाने के बाद जनाब तशरीफ लाये। हाय,हैल्लो की औपचारिकता पूरी करी और फिर गायब व मशगूल अपने गेम में। हम भी पहुंचे उ... [पूरी पोस्ट]
writer anuradha srivastav
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[04 Jan 2008 06:30 AM]

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