गणतंत्र दिवस- दिल से या रस्म अदायगी.......

अंतर्मन झंडारोहण के बाद कुछ देर पहले ही फैक्ट्री से लौटे हैं।दिल कुछ भारी सा है। आज गौर किया तो महसूस हुआ कि झंडारोहण के बाद राष्ट्रीयगान वाले सिर्फ कुछ ही लोग थे। मज़दूर महिलाऒं की बात छोड दी जाये क्योंकि अधिकांश अंगूठा छाप हैं। लेकिन बाकि लोगों की बात करें... [पूरी पोस्ट]
writer anuradha srivastav
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[26 Jan 2008 04:57 AM]

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