सिर्फ बातों से क्या होगा

अंतर्मन विश्वमहिला दिवस के रुप में फिर आ गया ८ मार्च। सही मानिये सिर्फ रुप में ही है। मुझे समझ में नहीं आता कि क्या आवश्यकता है किसी भी अवसर या मौके को दिवस के रुप में मनाने का । आखिर औचित्य क्या है? महिलायें जैसी पहले थी वैसी अब भी हैं। उनकी सामजिक स्थिति औ... [पूरी पोस्ट]
writer anuradha srivastav
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[08 Mar 2008 06:24 AM]

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