नया नहीं बन पाया तो...
नया नहीं बन पाया तो सम्बन्ध पुराना बना रहे, आखिर जीने की खातिर कोई बहाना बना रहे, सच कहती हूँ कभी नहीं मैं तुमसे कुछ भी चाहूँगी, बस बेगानी बस्ती में इक ठौर ठिकाना बना रहे. सहन कभी क्या कर पायेगी मेरे दिल की आहट यह, तुम बेगाने हो जाओ, गुलशन गुलज़ार ये...
[पूरी पोस्ट]
नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
5
0
0
0
0
[16 Aug 2009 19:15 PM]



Shuffle








