माटी मेरे देश की

नई क़लम  - उभरते हस्ताक्षर शत्रुओं को सदा मुँहतोड़ देती है जवाब किन्तु मित्र की है मित्र माटी मेरे देश की भारत की रक्षा करें मौत से कभी न डरें ऐसे देती है चरित्र माटी मेरे देश की शौर्य की भी जननी है शान्ति की भी अग्रदूत सचमुच है विचित्र माटी मेरे देश की सीने से लगाओ चाहो माथे... [पूरी पोस्ट]
writer नई कलम - उभरते हस्ताक्षर
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[24 Aug 2009 10:37 AM]

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