कब तुम आते हो
कब तुम आते हो कब तुम जाते हो वायुमंडल के मध्यांतर में सुगन्ध बिखरी सी है धुंध आप ही छँट जाता है अन्धकार सब हट जाता है मेरी बेकरारी को कितना तरसते हो कब तुम .... हर मोड़ से कई रास्ते निकलते हैं हर रास्ते पर कई मोड़ मिलते हैं फासलों को छुओ तो कुछ दूर औ...
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Anupama
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[10 Dec 2008 21:41 PM]



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