दिल के दर्पण
जब दिल होता है बहुत उदास कर न पाते हैं कुछ हदें बरदाश्त दिल के दर्पण में झलकता दिखता है तुम्हरा चेहरा फलकता है पानी इन नैनों से ढलती जाति है सांझ बढता जाता है दर्द कहीं खो जाते हैं हम तुम्हारी आखों के समंदर में जैसे सूरज ङूब जाता है वादों में हम तो ड...
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Anupama
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[10 Dec 2008 21:41 PM]



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