सपन

मेरी परिक्रमा... चपल-चपल होये अंतर मन मे उमड़-घुमड़ घटा देखो छाई भीगी-भीगी ऋतु में सुधि पिया की फिर आयी थिरक-थिरक अँगिया में छनन-छनन पायलिया बाजी घनघोर हुयी बदरिया कि कारी घटा देखो फिर छाई सरर-सरर बल खा भागी झरर-झरर मारी प्रेम पिचकारी हाथन मा लागी मेंहदी दर पर मोरी ब... [पूरी पोस्ट]
writer Anupama
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[10 Dec 2008 21:41 PM]

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