तस्वीर और क्षणिकायें
एक एक फर्क है इस तस्वीर में और तुममें इसमें तुम मुस्कुराते हो... दो लम्हों को सजाने के लिये ली थीं तुम्हारी तस्वीरें तस्वीरें यहीं हैं लम्हें कहीं नहीं यादें तो बहुत थीं तुम्हारी, पास मेरे मगर क्या करुँ ख्वाबों मे सारे धंधला गये चेहरे तुम्हारे ... ती...
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Anupama
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[10 Dec 2008 21:41 PM]



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