ख्वाबों के ज़ज़ीरे

मेरी परिक्रमा... देखे हैं डूबे हुये ख्वाबों के ज़ज़ीरे यहाँ देखे हैं भटकते चाहतों के काफिले यहाँ... हकीकत से हारी है दिल वालों की दुनियाँ गम-ए-दिल की है ये हम पर मेहरबानियाँ नहीं बस सका मेरे प्यार का आशियाँ सुनने को तरसे हम खुशियों की शहनाइयाँ देखे हैं डूबे हुये ख्वाबो... [पूरी पोस्ट]
writer Anupama
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[10 Dec 2008 21:41 PM]

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