नज़्म

मेरी परिक्रमा... झुकी पलकें झपक कर वो सोचते हैं आँखें बरसात सोख गई उन्हें इल्म नहीं पलकों पर चमकते हैं अश्क़, जैसे मेहराब पर ठहरी बून्दें.... मेहराब= छप्पर, छज्जा... [पूरी पोस्ट]
writer Anupama
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[10 Dec 2008 21:41 PM]

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