तुम्हारा प्यार...

मेरी परिक्रमा... कभी शबनम तो कभी शोला कभी बरसात, कभी तृष्णा कभी बन्धन तो कभी मुक्ति कभी आँसू कभी अंगार तुम्हारा प्यार... फलक पर टिमटिमाते तारे सा प्यार रोम-रोम में घुलता मोम सा प्यार तुम्हारा प्यार... पुरातन में प्यार, मेरे वर्तमान में प्यार सृष्टि में प्यार, सागर मे... [पूरी पोस्ट]
writer Anupama
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[10 Dec 2008 21:41 PM]

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