शायरी
छू कर आई हूँ रूह-ए-यार को तू मेरे बदलते अन्दाज़ तो देख शोखियों में डूबी हैं तार तार इन झुकी पल्कों के राज़ तो देख ......
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Anupama
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[02 Sep 2008 07:24 AM]



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