राज ठाकरे के नाम एक खुला ख़त (कविता)

Chaupal अबे ओ राज ! मत फैला कोढ़ में खाज क्षेत्रीयतावाद के चूल्हे पे वोटों की रोटियाँ पका रहा है नफरत के जंगल में एक और विषबेल उगा रहा है माना कि व्यवस्था गुंडों की रखैल है शरीफ आदमी के जीवन में विवशताओं की नकेल है किससे भिड़े ,किसको दिखाए हर हथेली में ज़ख्म ह... [पूरी पोस्ट]
writer Atul CHATURVEDI
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[02 Nov 2008 12:30 PM]

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