कुछ लघु पत्रिकाओं के विषय में (एक )
आजकल में कुछ नयी लघु पत्रिकाओं को पढ़ रहा हूँ । इसमे सबसे पहले "पाखी " का उल्लेख करना चाहूँगा । अपूर्व जी का प्रयास अच्छा है । लेकिन अभी प्रशंसा से बचने की जरूरत है । एक नयी पत्रिका की ध्वनी ऐसी जानी चाहिए कि उस पर किसी वाद का लेबल न लगे । कविताएँ यश...
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Atul CHATURVEDI
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[25 Nov 2008 10:18 AM]



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