कुछ लघु पत्रिकाओं के विषय में - दो
पाखी से ही अपनी बात शुरू करूंगा । विश्वनाथ त्रिपाठी जी की आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी की जीवनी का अंश प्रभावी है । एक लेखक के संघर्ष का ईमानदार चित्रण किया गया है । आचार्य द्विवेदी जी की वक्तृता का उल्लेख ,उनकी कार्य के प्रति लगन अनुकर्णीय है । अशोक...
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Atul CHATURVEDI
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[30 Nov 2008 12:35 PM]



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