नए साल में सब कुछ नवा -नवा (व्यंग्य )
आ रहा है नया साल । काहे को हो रहे हैं आप बेहाल ? मत बदलिए अपनी चाल । चलिए वैसे ही बेढंगे ,आड़े-तिरछे ,दूसरों को रौंदते हुए किसी राजकुमार विजित की तरह । भाषावाद को , प्रान्तीयतावाद को लगाइए एक और चिंगारी ताकि जले इसमें अक्खा भारत का नर -नारी । नए साल क...
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Atul CHATURVEDI
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[30 Dec 2008 08:58 AM]



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