ग़ज़ल : इतना ही एहसास बहुत है
इतना ही एह्सास बहुत है, वो अब मेरे पास बहुत है । उसके आगे सच्चे मन से, दो पल ही अरदास बहुत है । क़िस्मत न हो सीता जैसी, महल हैं कम, बनवास बहुत है । जो हैं पानीदार यहाँ पर, उनकी देखो प्यास बहुत है । ये सुनना गाली लगता है, ’तू अफ़सर का खा़स बहुत है’ । अन...
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शरद तैलंग
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[19 Jul 2008 14:18 PM]



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