ग़ज़ल : जब दिलों में प्यार का मंज़र बनेगा

सब कुछ जब दिलों में प्यार का मंज़र बनेगा, देखना उस दिन ख़ुदा का घर बनेगा । बन गया अपने वतन का वो तो लीड़र, कुण्डली में था कि जो तस्कर बनेगा । है यकीं इक दिन ख़ुदा देगा मुझे भी, पर न जाने कब मेरा छ्प्पर बनेगा । सांस ले ली बाप ने भी आख़िरी अब, फूल जैसा भाई भी नश्त... [पूरी पोस्ट]
writer शरद तैलंग
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[19 Jul 2008 14:27 PM]

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