ग़ज़ल : ग़र ज़माने का करम उसको कभी

सब कुछ ग़र ज़माने का करम उसको कभी खल जाएगा, वो सज़ा हमको मिलेगी सब यहाँ जल जाएगा । यूं तो हमने खैरियत लिख दी उन्हें मज़मून में, हम शिकस्ता हाल हैं उनको पता चल जाएगा । इतनी बारिश में अगर जो घर तुम्हारा बह गया, फ़िक्र क्या है अब ख़ुदा के घर में तू पल जाएगा । हमन... [पूरी पोस्ट]
writer शरद तैलंग
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[28 Jan 2009 08:51 AM]

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