ग़ज़ल : हमारी मिन्नतों पर वो अगर कुछ ..

सब कुछ हमारी मिन्नतों पर वो अगर कुछ ध्यान न देता, ज़माना नाम उसको फिर कभी भगवान न देता । मुझे हर हाल में चाहत तुम्हारी ज़िन्दा रखनी थी, तुम्हारे इक इशारे पर मैं वरना जान न देता । न होती उसको मेरे चैन से सोने की जो चिन्ता, मुझे आराम करने के लिए शमशान न देता ।... [पूरी पोस्ट]
writer शरद तैलंग
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[20 Jul 2008 14:05 PM]

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