ग़ज़ल : इन दुकानों में सजा सामान ...

सब कुछ इन दुकानों में सजा सामान सब बेकार है, पहले जैसा अब कहीं भी तीज न त्यौहार है । दीप थोडी़ देर ही जलकर के देखो बुझ गए, अब न वैसा तेल है न तेल में वो धार है । खिड़कियाँ ही जब मकानों की सड़क की ओर हैं, फिर शिकायत क्या ? सड़क का आदमी बदकार है । सिर्फ़ नेताओं क... [पूरी पोस्ट]
writer शरद तैलंग
views
9
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[20 Jul 2008 14:04 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix