ग़ज़ल : इन दुकानों में सजा सामान ...
इन दुकानों में सजा सामान सब बेकार है, पहले जैसा अब कहीं भी तीज न त्यौहार है । दीप थोडी़ देर ही जलकर के देखो बुझ गए, अब न वैसा तेल है न तेल में वो धार है । खिड़कियाँ ही जब मकानों की सड़क की ओर हैं, फिर शिकायत क्या ? सड़क का आदमी बदकार है । सिर्फ़ नेताओं क...
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शरद तैलंग
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[20 Jul 2008 14:04 PM]



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