ग़ज़ल : आंतडियों से मिलकर उसका ..
आंतड़ियों से मिलकर उसका जाने ये क्या हाल हुआ ? ख़ंजर का चेहरा भी देखो शरम के मारे लाल हुआ । एक समन्दर के बावत बस इतना ही हम जान सके, कई कश्तियां लील गया वो तभी तो मालामाल हुआ । फूलों ने तानाशाही का वो भी आलम देखा है, जिसने गर्दन ऊँची की गुलशन में वही...
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शरद तैलंग
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[22 Jul 2008 03:45 AM]



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