ग़ज़ल : इस जहाँ में अब ये किस्सा आम है

सब कुछ इस जहाँ में अब ये किस्सा आम है, प्यार जो करता है वो बदनाम है । वो तो इंसां को खुदा सा पूजता है, इस तरह का मुझ पे इक इल्जा़म है । सारी दुनियां को वो ठोकर मारता है, जिसके हाथों में सुरा का जाम है । खुश है वो बाजी़ सियासत की बिछा, जिनके पत्तों में तुरुप... [पूरी पोस्ट]
writer शरद तैलंग
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[25 Jul 2008 14:32 PM]

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