ग़ज़ल : उन हसीं लम्हों को फिर आबाद करना
उन हसीं लम्हों को फिर आबाद करना तुम कभी बचपन के दिन भी याद करना । लौट आएं फिर से वो गुज़रे ज़माने, तुम खुदा से बस यही फ़रियाद करना । दिल तुम्हारा भी गगन में उड़ चलेगा । कै़द से पंछी कोई आज़ाद करना । नाखुदा के ही भरोसे पर न रहना, तुम खुदा को भी सफ़र में य...
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शरद तैलंग
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[04 Aug 2008 14:28 PM]



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