ग़ज़ल : मेरा साया मुझे हर वक्त कुछ
मेरा साया मुझे हर वक़्त कुछ बदला सा लगता है, मगर ये साथ देता है तो फ़िर अपना सा लगता है। सितारे भी तो रातें जाग कर हरदम बिताते हैं, अब अपना दर्द उनके सामने अदना सा लगता है। नदी जब सूख जाती है तो खुश होते किनारे हैं, दख़ल देना किसी का बीच में गन्दा सा लग...
[पूरी पोस्ट]
शरद तैलंग
6
0
0
0
0
[16 Oct 2009 12:45 PM]



Shuffle








