बयानों की बानगी
संजय कुमार नेता-अिनेता. अिनेता-नेता. दोनों ही इनदिनों एक-दूसरे के पूरक हो गये हैं. वह नेता ही क्या, जो अिनेताओं की तरह खड़े मंच पर शब्दों के जाल न फेकें, विलेन को पछाड़ने के लिए हुंकार न रे. वह अिनेता ही क्या, जो कलाकारी के दावं पेंच न सीखें. झूठ...
[पूरी पोस्ट]
sanjay
11
0
0
0
0
[04 Apr 2009 08:16 AM]



Shuffle








