बहुत हुई पूजा देवों की, कर दो मूर्त्ति विसर्जन आज...

कुछ शब्द स्वतंत्रता दिवस मनाने का मेरा अपना ही ढंग है। सच कहूं तो भारत के संबंध में मुझे दिनकर जी की बात याद आती है जो कहते हैं- मानचित्रों में नहीं हृदय में शेष कहीं भारत है। चाहता हूं, प्रेम के गीत लिखूं पर जब अपने भारत को देखता हूं, जब देखता हूं इसके सामाज... [पूरी पोस्ट]
writer रविकांत पाण्डेय
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[15 Aug 2009 01:37 AM]

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